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खौफ़ के सौदागर


खौफ़ के सौदागर
मौत बाँटने निकले हैं।
धरा लहू से लाल हुई,
जिनको मारा वे तेरे अपने है।

सपनों की कलियाँ पल भर न मुसकाई
बारूद के धुएँ में है नन्हीं कलियाँ मुरझाई

भविष्य को तुमने आज मिटाया,
खुद खुदा भी रचना पर है शरमाया।
मानव-पिचाश बन देखो,
खुद शैतान रूप बदल कर आया।

सतगुरू शर्मा
09559976047

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