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अधूरी मोहब्बत का अफ़साना हूँ, भरी भीड़ में इक बेगाना हूँ। है साथ तेरे यादों की मस्ती कहते है लोग मैं दीवाना हूँ।। दीवाली की रात है दियों की बा...
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उसकी वो बोलती आँखें, ख़ामोश जुबां मे जाने क्या—क्या कह गयीं कि मचल उठे जज्बात जागी कलम और अल्फाज कागज पर बिखर गये। सतगुरू शर्मा

