बूंद बन बारिश कि, बरसते तुम,
याद के मानिंद आहिस्ता-आहिस्ता
झिर-झिर हम-पर झरते तुम।
भीग जाता मैं...2
जऱरा-जऱरा, कतरा-कतरा
ना तरसता और..
जब बूंद बन, बरसते तुम ।।
मेरे चेहरे पर मोतियों से...
गिरते और सरकते तुम।
काश! के इस भीगे सावन में
बारिश सा बरसते तुम।।
महसूस करता हूँ तुझको
बूंदों से लिपट कर।
काश कि भादों बन
हम पर ही झरते तुम।।
ना ज़माने कि परवाह है मुझको
लोग क्या कहेंगें, क्या कहेगा ज़माना
चूम लेता सरेबाज़ार मै तुमको,
जब मेरे होठो से गुज़रते तुम।
काश! कि बूंद बन कर बरसते तुम।
SatGuru Sharma
15/09/2021

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