dil ki duniya guru
यादों का कांरवां मासूम गुरू लखनवी के साथ
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कहते है लोग मैं दीवाना हूँ
अधूरी मोहब्बत का अफ़साना हूँ,
भरी भीड़ में इक बेगाना हूँ।
है साथ तेरे यादों की मस्ती
कहते है लोग मैं दीवाना हूँ।।
दीवाली की रात है
दियों की बारात है
खुश है जो अंधेरों में,
मैं वही आशियाना हूँ।
है हसरत-ऐ-जिंदगी
बस फ़कत इतनी
तेरी चाहत में जान जाए
बस वही परवाना हूँ।
दर्द में सुकूं की...
तलाश लिए फिरता हूँ।
कोई बताए उनको
ऐसा सिफ़त-ए-दिल मस्ताना हूँ ।
Satguru Sharma
4 comments:
Anonymous
19 October 2022 at 22:52
Nice poetry
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Anonymous
19 October 2022 at 23:09
Nice Line
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Anonymous
19 October 2022 at 23:37
🔥🔥🔥
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Anonymous
20 October 2022 at 18:20
💕
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Nice poetry
ReplyDeleteNice Line
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