रिमझिम घटा छाई,
भरे ताल-तलैया, खढ्ढे
फुदक-फुदक गौरैया देखो खूब नहाई
मुन्नी मुडेर पर भागी
चंद बूँदें बारिश की
नन्ही हथेली पर चुरा लाई।
सौंधी महक माटी की
हर गली हर तरफ है सुहाई
पपिहा बैठ पेड़ पर
कोयल संग तान लगाये।
काका चैपालों में देखो
राग मल्हार सुनायेें।
सतगुरू ‘मासूम’
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