दिल पत्थर यह दुनिया पत्थर,
पत्थर के हो गये सनम।
हंसी लबों की सबने देखी,
ना देखी थी आँखें नम।
दिल पत्थर यह दुनिया पत्थर,
पत्थर के हो गये सनम।
हम भी अब पत्थर के बन गये,
मन के ताप से सपने जल गये।
अरमां उड़ गए बन के शबनम,
दे गयी मुझको आंखें वह नम।
दिल पत्थर यह दुनिया पत्थर,
पत्थर के हो गये सनम।
काश की दिल पत्थर का होता,
कभी किसी का दिल ना रोता।
काँच के जैसे बात-बात पर,
टूट-टूट न सपने खोता।
दिल पत्थर यह दुनिया पत्थर,
पत्थर के हो गये सनम।
सनम ना होते, रंज ना होता
धोखे का तब तंज ना होता
सब कुछ होता इस जहां में,
मगर-बेवफा सनम ना होता।
दिल पत्थर यह दुनिया पत्थर,
पत्थर के हो गये सनम।
सतगुरू
15/02/2018
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