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बेवफ़ा यार
















निगाह फेरने का हुनर तुमको खूब आता है,

तारीख़ गवाह है हुस्न और वफ़ा साथ कब रह पाता है


यकीं था मुझको..

बदलेगा तू वक़्त के हाथों मजबूर हो कर

मालूम ना था मौसम के मानिंद, 

तू पल में इस तरह बदल जायेगा।


जो थकते नही थे ..2

प्यार की कसमें खा—खा कर,

वो महबूब, मेरी मुहब्बत का सर

अपने पैरों से कुचल कर जायेगा।


चलो अच्छा हुआ ....2

मेरा भरम तो टूटा,

थोड़ा वक़्त गुजरा है, 

बाकी भी गुजर जायेगा।


मुहब्बत की लाश कांधें पर रख कर..2

बता कि तू कितनी दूर और जायेगा।


मैं तो अपनी पाक—मुहब्बत का हवाला दे दूँगा,

तू बता मालिक को कयामत पे क्या मुँह दिखायेगा?


सतगुरू

26 मार्च 2018

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