Search This Blog

मनमीत

 
मनमीत हो इक मीत सा,
अनकही इक प्रीत सा।
लब जरा हिले नहीं, शब्द भी मिले नही।
हृदय में उतरता वो, मंद-मंद गीत सा।।

💟💟💟💟💟💟💟💟
ना कही कुछ भी बात,
जाने वो मेरे सब दिन-ओ-रात।
मन को मिला ना कोई,
हो जो मन का इक मीत सा

💟💟💟💟💟💟💟💟 
पढ़ ले जो ख़ुश्बुओं के खत
जिसे पाकर लगे
हो इक हार में, वो जीत सा
मनमीत हो इक मीत सा...

💟💟💟💟💟💟💟💟 
कह सकूँ मैं..
कह सकूँ मैं जिससे सारी बात ।
हुई जो उनसे मुलाकात,
मुख़्त
र सी गुजरी पूरी रात
💟💟💟💟💟💟💟💟
बातों का समंदर
है सीने में समाया।
मुमकिन है कि ना हो...
इक भी लफ़्ज़ की मुलाकात ।।

💟💟💟💟💟💟💟💟 
 मनमीत हो इक मीत सा
अनकही इक प्रीत सा...

💟💟💟💟💟💟💟💟 
 दर्द महसूस हो मेरा उसको भी
बिन कहे ही जान ले
कहने को हो ना कोई बात
कभी हो जो मुलाकात।

💟💟💟💟💟💟💟💟
सतगुरू शर्मा 
28 अगस्त 2017

अभी-अभी बारिश थमी है


अभी-अभी बारिश थमी है
बंद पलकों में भी थोड़ी सी नमी है... ...

बारिश में आँखों से सब बह आया था
दुखती यादों का जो घना साया था
अब सब धुला-धुला सा है
दर्द भी अब थोड़ा घुला-घुला सा है

कि अभी-अभी बारिश थमी है
बंद पलकों में भी थोड़ी सी नमी है... ...

मन के आसमां में इक सुकूं आया है
हर शाख का हर पत्ता नहाया है,
कड़वी यादों को अश्कों मे बहाकर...2
आज खुद को हमने खुद में पाया है।

कि अभी-अभी बारिश थमी है
बंद पलकों में भी थोड़ी सी नमी है... ...

मन की तपती तंग गलियों में...2
भी अब पानी है।
दर्द का एहसास अब इक कहानी है।
कि अभी-अभी बारिश थमी है

बंद पलकों में भी थोड़ी सी नमी है... ...

सतगुरू शर्मा

एक निगाह तुम्हारे साथ है____

मैं रहूँ कहीं
एक निगाह तुम्हारे साथ है।
हर मुश्किल में यकीनन थामेंगा जो तुम्हें,
हो न हो वो सिर्फ मेरा ही हाथ है।।

जाते देख तुम्हें, कुछ ना बोला मैं
देखते पलटकर मेरी आँखों में;
वो पानी की बूँदें नही
मेरे जज़्बात हैं।

मैं खड़ा हूँ अब भी उसी दो राहे पर
लौटोगे इक रोज तुम...
लौटोगे इक रोज तुम...तो होगा दिन,
नही तो अब बस.. हर जगह रात है।

मेरी कलम से
सतगुरू

मेरी बिटिया


















बचपन को पाने की तृष्णा,
बेटी बन कर घर आयी।
बरसो से सूने आँगन में,
कोयल बनकर वह गायी।
घर के घुप्प अँधेरे में,
जुगनू बन कर वह छायी।
नागफनी से मन उपवन में,
रजनीगन्धा महकायी।
नन्ही की किलकारी में,
मैने अपना बचपन पाया।
जो बिटिया ने उँगली थामी,
संसार सिमट उसमें आया।

जीवन अब इक नयी आस है,
हर दिन उसके साथ ख़ास है।
उसको बस मैं हँसता देखूँ,
नयनों में बस यही प्यास है।
चंदा सी वह बढ़ती जाए,
मुख पर पूनम का प्रकाश है।
मेरी चंदा सूरज वो है,
उसकी खुशियों का एहसास है।
जग की रीत निभानी है,
उसकी डोली भी जानी है।
मिला सपनों का राजकुमार,
मेेरी आँखों में पानी है।
चमकेगी मेरी बिटिया,
दूजे घर भी जाकर।
यकीं है मुझको ना भूलेगी,
मनचाहा वर पा कर।
पर नन्ही पापा की बिटिया,
अब भी मेरे साथ है।
सब बोलें है बाबा की बिटिया,
देखो सब से ख़ास है।


सतगुरू शर्मा

पथिक


मत हिम्मत तू हार पथिक,
पथ मेें कई बहार पथिक।


घनघोर है कारी रात तो क्या?
देखो आगे भोर खड़ी; ले सूरज का हार पथिक।


माना की पथ बड़ा विकट है!
संघर्ष है जीवन का सार पथिक।


तपा नही जो कनक ताप में,
क्या वह कुन्दन-हार पथिक?


उठो बढ़ो और हिम्मत बाँधों,
यूँ ही मत जाओ.. हार पथिक।


मानव जीवन मिला भाग्य से, 

जाए न बेकार पथिक।

मत हिम्मत तू हार पथिक, 

पथ मेें कई बहार पथिक।

सतगुरू शर्मा (मासूम)