Search This Blog

ऐ जिंदगी! हर मोड़ पर तूने छला...



ऐ जिंदगी! क्यों?
क्यों मुझको, हर मोड़ पर तूने छला।
आया था उज़ालों की ख़्वाहिशें  ले कर,
आखि़री सफ़र तक मुझको अंधेरा मिला।।

ऐ जिंदगी! मुझको हर मोड़ पर तूने छला...

क्या ख़ता थी मेरी,
कि सबकी खुशी चाही मैनें,
मेरी खुशियों कि चाह रखने वाला
उम्र गुज़री पर एकभी ना मुझको मिला ।

ऐ जिंदगी! मुझको हर मोड़ पर तूने छला...

सावन की झीनी फुहार समझ
ऐ जिंदगी! तुझको गले लगा बैठा
वक़्त से जो नज़र मिलायी,
काँटों का इक हार मिला।

ऐ जिंदगी! मुझको हर मोड़ पर तूने छला...

सतगुरु 13/09/19

.....पर तुम ना आए


सावन आया पर तुम ना आए 
बरखा आई घनघोर घटा लाई
पर...
पर तुम ना आए

सावन बरसा.. झूम-झूम कर 
मन मयूर तरसा, घूम घूम कर 
भीगा घर-आंगन और भीगा है तन 
सूखा था... सूखा रह गया, मेरा प्यासा मन 

सावन आया पर तुम ना आए 
नयनो ने नीर, खूब बरसाए 
बादल गरजे; हमें डराऐ
सावन आया पर तुम ना आए 

यादों के बादल हम पर ही 
बरस-बरस जाए 
सावन आया 
पर तुम क्यों ना आए??

सतगुरु
०३ / ०८ / २०१९